EVERY DROP COUNTS
जब कभी नल से व्यर्थ मे पानी बहता है,
कही दूर आँखो से आँसू बहते है प्यास मे,
निगाहो को रखे उपर की तरफ
बैठे रहते है दो बूँद की आस मे,
पानी को खिलोना समझकर हम उससे खेला करते है,
हमारे इस खेल की सज़ा वो बेचारे भरते है
सूखे होठ और खाली बर्तन उनका दुख बया करते है,
उनके बुझे बुझे से चेहरे पानी की राह ताकते है
देख कर भी सब कुछ हम बने रहते अंजान है,
क्यो नही सोचते उनके बारे मे,आख़िर वो भी तो इंसान है
आदमी से ज्यादा तो कुत्ता वफ़ादारी रखता है
वो बचा लेता पानी पर वो नल बंद नही कर सकता है
ऐसे मे इंसान इंसानो से ही आस लगाए है,
की समझ जाए वो पानी बिन सब तंग है,
जीवन की शुरुआत पानी से है और जल ही जीवन है
कही ऐसा ना हो की समझने मे ही देर हो जाए
समय छूट जाए हाथो से और पानी ही ख़त्म हो जाए
तो आओ मिलकर प्राण ले की हरदम आस जगाएँगे
बचा ना सके पानी तो क्या,व्यर्थ मे पानी नही गावाएँगे
जब कभी नल से व्यर्थ मे पानी बहता है,
कही दूर आँखो से आँसू बहते है प्यास मे,
निगाहो को रखे उपर की तरफ
बैठे रहते है दो बूँद की आस मे,
पानी को खिलोना समझकर हम उससे खेला करते है,
हमारे इस खेल की सज़ा वो बेचारे भरते है
सूखे होठ और खाली बर्तन उनका दुख बया करते है,
उनके बुझे बुझे से चेहरे पानी की राह ताकते है
देख कर भी सब कुछ हम बने रहते अंजान है,
क्यो नही सोचते उनके बारे मे,आख़िर वो भी तो इंसान है
आदमी से ज्यादा तो कुत्ता वफ़ादारी रखता है
वो बचा लेता पानी पर वो नल बंद नही कर सकता है
ऐसे मे इंसान इंसानो से ही आस लगाए है,
की समझ जाए वो पानी बिन सब तंग है,
जीवन की शुरुआत पानी से है और जल ही जीवन है
कही ऐसा ना हो की समझने मे ही देर हो जाए
समय छूट जाए हाथो से और पानी ही ख़त्म हो जाए
तो आओ मिलकर प्राण ले की हरदम आस जगाएँगे
बचा ना सके पानी तो क्या,व्यर्थ मे पानी नही गावाएँगे

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