जब वक़्त मिलता है, सोच लिया करता हूँ,
तेरी यादों को अतीत से नोच लिया करता हूँ,
कुछ पल के लिए ही सही एक बहाने से
ये बहते हुए आँसू पोछ लिया करता हूँ
गम का होना तो अब ज़हन मे शामिल है
पर फ़ितरत की खातिर मै खुश रहा करता हूँ
कुछ रस्मे ज़माने की रास नही आती,
एक आस लगाए मै सब सहा करता हूँ,
मोती की कीमत का मुझे अंदाज़ा नही है,
उन आँखो के पानी को बचाए रखता हूँ,
मेरी ज़िंदगी की कहानी मेरे हौसलो से है,
मै आँधी मे दीया जलाए रखता हूँ,
ना जाने किस दर पे कोई जश्न आ जाए,
हर शाम इसलिए घर सजाए रखता हूँ
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