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Sunday, 17 July 2016



OP-गान  (An IIT-KGP  thing ) 

सब कुछ होना था एक दफा ,
थोड़ा डर तो लगता था ,
तब रैगिंग और OP में अंतर
कौन भला समझता था ,

दिन था पहला, एक डायरी थी
और शर्ट पैंट थे फॉर्मल से
जब आती मुझको शायरी थी
और धडकन सब abnormal थे

पहले पन्ने पर जसके था
कुछ intro जैसा लिखा हुआ
सब डरे हुए थे , सहमे थे
चेहरे पर था सब बिछा हुआ

कुछ अनजाने से नाम भी थे
जो याद कभी न होते थे
तब रातें भी कुछ और ही थीं
जब ११ बजे ही सोते थे

जब भूख नहीं लगती थी अक्सर
mess नहीं जब जाते थे ,
टिक्का पर खाना मुश्किल था
जब sir कोई दिख जाते थे

जब बंदी रूठी रहती थी
हम badicourt में होते थे
जब गलियां गन्दी लगती थी
हम चुपके चुपके रोते थे

जब GC के सारे FUNDE
कुछ याद हुआ नहीं होते थे
और सुबह सुबह मारे मन से
sports के trial होते थे

जब गलती से बैठे वहां पर
हसीं कभी छूट जाती थी
जब sir सारे चिल्लाते थे
और घर की याद भी आती थी

जब sutta -chocolate लेते थे
हर wing में जाना पड़ता था
जब बजर राउंड के चक्कर में
कोई दर्द कहीं पर उठता था

जब कभी अँधेरा होता था
कोई yo MS चीखता था
और हसीं ठहाकों के जुमले में
जुगनू विंग में दिखता था

जब शुरू हुई थी OP तो
कुछ भी अच्छा न लगता था
मैं सो भी जाता रातो में
तो एक बच्चा अंदर जगता था

जो सोचता था भोले मन से
क्या sir लोगों का दिल ना  है
सब वक़्त की ही बर्बादी है
और इन सब से मिलना क्या है

पर खत्म हुई फिर OP जब
तब जा के बात समझ आई
की वक़्त लगा था थोड़ा सा
बन गए मेरे कितने भाई

जब sir हो गए दोस्त सारे
जब HALL से अपने प्यार हुआ
एक साथ सब मिल आये
और MS एक परिवार हुआ










2 comments:

  1. दिल को छु गयी यार......

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