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Tuesday, 26 July 2016

गुडगाँव : पार्ट-1




रात भर चौड़ी सड़कों पर 
सुनाई देती है जल्दबाजी
रात भर अपनी आँखे  बिछाये  
चलती रहती है गाड़ियाँ 
सुस्ताये होठो से निकलकर 
रात भर उड़ता है धुआं 
और सातवीं मंजिल पर कुछ आंखे 
रात भर लड़ती हैं नीदं से 

ये गुडगाँव है जनाब 
शोहरत का शहर है 
कुछ मुझ जैसा ही बिगड़ा हुआ है  
ये शहर भी अक्सर रात भर जगा रहता है 



Sunday, 17 July 2016

IIT-KGP Experience








MESSAGE TO JUNIORS

क्यूंकि मैं अपने आप को अच्छा इंजीनियर नहीं मानता इसलिए ये सन्देश एक लेखक ही हैसियत से दूँ तो बेहतर होगा।  इस 2200 acre  के कैंपस में जो दो सबसे खतरनाक चीज़ें हैं वो हैं आपका laptop और आपका room , अगर शुरुआत में ही आप इनमे जरुरत से ज्यादा लिन हो गए तो आपके भविष्य की रेखाएं चिंताजनक हो सकती हैं । मैंने देखा है कुछ लोग इस 13000 वाली जनसंख्या वाले कैंपस में हो कर भी कितने अकेले होते हैं , ऐसे लोगो से कहूंगा अकेले मत रहो ,बाहर निकलो, लोगो से मिलो , आसपास की खूबसूरती को पहचानो , हर महफ़िल का हिस्सा बनो ।

सबसे जरुरी अगर हो सके तो इश्क़ करो ,इश्क़ से मेरा मतलब सिर्फ बंदी से नहीं है , इश्क़ से मेरा मतलब है वो सारी चीज़ें जो आपको ख़ुशी देती हैं , सबसे इश्क़ करो ,इस कैंपस से , acads से ,हॉल से ,dept से और अपने दोस्तों से ।  गर्लफ्रेंड बनाओ , और उसके बाद जब कभी उसके साथ 2. 2  घूमोगे तो तो तुम्हे 2.2 की संकीर्णता का पता चलेगा ,कभी नेताजी auditorium के पर्दे पर भी ज़िन्दगी को चलते देखो, nehru museum की ख़ामोशी को सुनो, gymkhana के टॉप की टेढ़ी सतह पर लेट कर देखो वहाँ से ज़िंदगी कितनी सीधी लगती है ,कभी tech market के जावेद हबीब की सीढ़ियों को सुनो ,तुम्हे पता चेलगा की kgp में इश्क की हदें क्या हैं. इश्क़ करो इश्क़ इंसान को खूबसूरत बनता है ।

और इन सब के बीच बुरी आदतों से बचो, हर चीज़ का अनुभव लो पर किसी का आदि मत बनो , याद रखो जिन्होंने तुम्हे, तुम्हारे भले के लिए खुद से दूर रखा है वो तुमसे बहुत प्यार करतें हैं , बिना सोचे समझे कुछ भी मत करो , असफल होना बुरा नहीं है , हारना बुरा नहीं है , बुरा है टूट जाना ,बुरा है कोशिश न करना , और सबसे खतरनाक है सपनो का मर जाना, इसलिए सपने देखो , टूट भी जाए तो भी देखो, खुद पर भरोसा रखो , जरूर सफल होगे ।

ये बहुत मुश्किल है की इंसान अपनी उम्र से आगे निकल जाये , इसलिए अपनी उम्र से आगे निकलने की कोशिश मत करो , वक़्त पर भरोसा रखो , वो अपने हिसाब से सबको सारी चीज़े दे देता है , हो सकता है तुम्हारा दिमाग तुम्हारी उम्र से आगे निकल जाये , पर तुम्हारा दिल हमेशा तुम्हे अहसास दिलाता रहेगा की तुम्हारी उम्र को क्या चाहिए ,इसलिए कभी कभी दिल की भी सुनो, ज़िन्दगी आसान हो जाएगी।  ज़िन्दगी बहुत खूबसूरत है ,कोशिश करो इसे और खूबसूरत बनने की , तुम ऐसी जगह पर हो जहां लाखों लोग होने के सपने देखते है , इसलिए बहाने मत बनाओ, इसे व्यर्थ मत करो,  मेहनत करो ,हर दिन कुछ नया सिखने की कोशिश करो , खुश रहो ,और याद रखो  सारा आसमान अनछुआ पड़ा है ,तो जाओ इसे छू कर अपने सपने पुरे कर लो ।   


OP-गान  (An IIT-KGP  thing ) 

सब कुछ होना था एक दफा ,
थोड़ा डर तो लगता था ,
तब रैगिंग और OP में अंतर
कौन भला समझता था ,

दिन था पहला, एक डायरी थी
और शर्ट पैंट थे फॉर्मल से
जब आती मुझको शायरी थी
और धडकन सब abnormal थे

पहले पन्ने पर जसके था
कुछ intro जैसा लिखा हुआ
सब डरे हुए थे , सहमे थे
चेहरे पर था सब बिछा हुआ

कुछ अनजाने से नाम भी थे
जो याद कभी न होते थे
तब रातें भी कुछ और ही थीं
जब ११ बजे ही सोते थे

जब भूख नहीं लगती थी अक्सर
mess नहीं जब जाते थे ,
टिक्का पर खाना मुश्किल था
जब sir कोई दिख जाते थे

जब बंदी रूठी रहती थी
हम badicourt में होते थे
जब गलियां गन्दी लगती थी
हम चुपके चुपके रोते थे

जब GC के सारे FUNDE
कुछ याद हुआ नहीं होते थे
और सुबह सुबह मारे मन से
sports के trial होते थे

जब गलती से बैठे वहां पर
हसीं कभी छूट जाती थी
जब sir सारे चिल्लाते थे
और घर की याद भी आती थी

जब sutta -chocolate लेते थे
हर wing में जाना पड़ता था
जब बजर राउंड के चक्कर में
कोई दर्द कहीं पर उठता था

जब कभी अँधेरा होता था
कोई yo MS चीखता था
और हसीं ठहाकों के जुमले में
जुगनू विंग में दिखता था

जब शुरू हुई थी OP तो
कुछ भी अच्छा न लगता था
मैं सो भी जाता रातो में
तो एक बच्चा अंदर जगता था

जो सोचता था भोले मन से
क्या sir लोगों का दिल ना  है
सब वक़्त की ही बर्बादी है
और इन सब से मिलना क्या है

पर खत्म हुई फिर OP जब
तब जा के बात समझ आई
की वक़्त लगा था थोड़ा सा
बन गए मेरे कितने भाई

जब sir हो गए दोस्त सारे
जब HALL से अपने प्यार हुआ
एक साथ सब मिल आये
और MS एक परिवार हुआ










FAREWELL



कुछ नए ख्वाब लेकर के मै kgp में आया था ,
Department मिला घासी थोड़ा तो पछताया था

पर धीरे धीरेदिन बीते ,यारों से थोड़ा करार हुआ
और रहते रहते घासी में ,घासी से मुझको प्यार हुआ

मेरे दोस्त थे और ,एक हॉल भी था
एक तुम भी थी ,एक बवाल भी था

जब हाथ तुम्हारा थामे मैं ,राहों में आगे बढ़ता था
ना जाने कब ये 2.2 ,8. 8  में बदलता था

अब सारे साथी बिछड़ रहे है ,तुम भी तो अब दूर रहोगी
टिक्का की चाय , vs में bye ,सारी बातें फ़ोन पे कहोगी

ये दिन अब न जाने कितने ,जन्मों बाद आएगा
मुझको kgp kgp kgp kgp ही याद आएगा


:-Wrote on the farewell of agfe dept iit kgp.

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