वो फूलों की खुशबू के जैसे,
मन मेरा महकती है ,
तंग करे, फिर खूब लड़े ,
दिल को मेरे बहलाती है ...
जब गम की बदली छा जाने से,
आँख मेरी भर आती है ,
वो खुशियों के सूरज से लड़कर,
धूप चुरा कर लाती है ...
वो नटखट है ,शैतान भी है ,
होठों पे मेरी मुस्कान भी है ,
जो सुनकर लोग है तृप्त हुए,
उन गीतो का वो तान भी है ...
वो चंचल है,होशियार भी है,
नफ़रत से परे एक प्यार भी है,
जो कथा कहानी क़िस्से है,
वो उन सब का एक सार भी है,
वो रौनक हे मेरे घर की,
मेरे घर का ही उजियला है,
घर भर मे सबकी प्यारी है,
वो ख़ुसीयो का एक प्याला है.....
जब कोई ग़लती करता हूँ ,
वो साथ मेरा ही देती है,
और पापा का गुस्सा न जाने,
खुद ही क्यों सह लेती है,
फिर साल के रक्षाबन्धन पर,
वो रखी मुझको बाँधती है,
खुश रहती,कुछ ना कहती,
बस इतना ही वो मांगती है,
की भाई तू मेरा प्यारा सा,
कुछ हो दुख बतला देना,
मै बहना तेरी प्यारी सी,
जो रूठी तो मना लेना,
माथे पे तिलक लगती है,
की भाई हरदम ख़ुश रहना,
मुझे भूल ना जाना भूले से,
ये कहती है मेरी बहना......
ये कहती है

No comments:
Post a Comment