सच बचपन कितना अच्छा होता है,नटखट लेकिन सच्चा होता है
अच्छा लगता है माँ के आंचल में सोना
वो बात बात पर हँसना रोना
खिलौनों की उस दुनिया में खोना
दिल नादान और दिमाग कच्चा होता है
सच बचपन कितना अच्छा होता है, नटखट लेकिन सच्चा होता है
अच्छा लगता है बहना की चोटी खीचकर सताना
बाद में फिर उसे टॉफी देकर मनाना
रात को फ्रिज की आइसक्रीम चट कर जाना
फिर सुबह खुद को निर्दोष बताना
मौज मस्ती भरपूर रचा होता है
सच बचपन कितना अच्छा होता है, नटखट लेकिन सच्चा होता है
अच्छा लगता है किसी जिद पर अड़ जाना
किसी और के झगड़े में खुद पड़ जाना
किसी और को सता कर किसी और को फसाना
उसे डांट खिलाकर खुद बच जाना
मन का शैतानी वो नक्शा होता है
सच बचपन कितना अच्छा होता है, नटखट लेकिन सच्चा होता है
आज फिर वही बाल -दिवस आया है
चाचा नेहरु की यादें संग लाया है
बच्चे तो खुश होते ही है ,
बड़ो पर भी आज ख़ुशी का साया है
क्योंकि हर बड़ा भी कही एक बच्चा होता है
सच बचपन कितना अच्छा होता है, नटखट लेकिन सच्चा होता है
--Wrote on the occasion of children's day when i was in class 9th.

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