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Friday, 19 April 2013

My little angel(बहना)





वो फूलों की खुशबू  के जैसे,
मन  मेरा महकती है ,
तंग करे, फिर खूब लड़े ,
दिल को मेरे बहलाती है ...

जब गम  की बदली छा  जाने से,
आँख मेरी भर आती है ,
वो खुशियों के सूरज से लड़कर,
धूप चुरा कर लाती है ...

वो नटखट है ,शैतान  भी है ,
होठों  पे मेरी मुस्कान भी है ,
जो सुनकर लोग है  तृप्त हुए,
उन गीतो का वो तान  भी है ...

वो चंचल है,होशियार भी है,
नफ़रत से परे एक प्यार भी है,
जो कथा कहानी क़िस्से  है,
वो उन सब का एक सार भी है,

 वो रौनक हे मेरे घर की,
मेरे घर का ही उजियला है,
घर भर मे सबकी प्यारी है,
वो ख़ुसीयो का एक प्याला है.....

जब कोई ग़लती करता हूँ ,
वो साथ मेरा ही देती है,
और पापा का गुस्सा न जाने,
खुद ही क्यों सह लेती है,

फिर साल के रक्षाबन्धन पर,
वो रखी मुझको बाँधती है,
खुश  रहती,कुछ ना कहती,
बस इतना ही वो मांगती है,

 की भाई तू मेरा प्यारा सा,
कुछ हो दुख बतला देना,
मै  बहना तेरी प्यारी सी,
जो रूठी तो मना  लेना,

माथे पे तिलक लगती है,
की भाई हरदम ख़ुश  रहना,
मुझे भूल ना जाना भूले से,
ये कहती है मेरी  बहना......
ये कहती है




"I know true love is heaven,but remember it comes only after the death"


"Sometimes you have to go alone in order to be with someone."

Saturday, 13 April 2013

कितना अच्छा होता है





 सच बचपन कितना अच्छा  होता है,नटखट लेकिन सच्चा होता है
अच्छा लगता है माँ के आंचल में सोना
वो बात बात पर हँसना  रोना
खिलौनों की उस दुनिया में खोना
दिल नादान  और दिमाग कच्चा होता है
सच बचपन कितना अच्छा होता है,  नटखट लेकिन सच्चा होता है 

अच्छा लगता है बहना की चोटी खीचकर सताना
बाद में फिर उसे टॉफी देकर मनाना
रात को फ्रिज की आइसक्रीम चट कर जाना
फिर सुबह खुद को निर्दोष बताना
मौज मस्ती भरपूर रचा होता है
सच बचपन कितना अच्छा होता  है,  नटखट लेकिन सच्चा होता है

अच्छा लगता है किसी जिद पर अड़ जाना
किसी और के झगड़े में खुद पड़ जाना
किसी और को सता कर किसी और को फसाना
उसे डांट खिलाकर खुद बच जाना
 मन का शैतानी वो नक्शा होता है
सच बचपन कितना अच्छा होता  है,  नटखट लेकिन सच्चा होता है

आज फिर वही बाल -दिवस आया है
चाचा नेहरु की यादें संग लाया है
बच्चे तो खुश होते ही है ,
बड़ो पर भी आज ख़ुशी का साया है
क्योंकि हर बड़ा भी कही एक बच्चा होता है 
सच बचपन कितना अच्छा होता  है,  नटखट लेकिन सच्चा होता है







--Wrote on the occasion of children's day when i was in class 9th.




वक़्त थामता क्यो नही.....



वक़्त थामता क्यो नही.....
ये हसीन सी राते,
अधूरी मुलाक़ते,
चाय के गर्म प्याले,
और खट्टी मीठी बाते,
इतना कुछ जीने मे,मन संभालता क्यो नही.
ये होना बड़ा अच्छा है,वक़्त थामता क्यो नही
वो 3 बजे सोना,
वो सपना एक सलोना ,
फिर देर से उठना,
और क्लास के लिए रोना
रोज़ का किस्सा है,कुछ बदलता क्यो नही..
ये होना बड़ा अच्छा है वक़्त थामता क्यो नही..
एग्ज़ॅम्स का आना,
थोड़ा सा डर जाना,
थोड़ा पढ़ना,फिर उब  जाना
कॉफ़ी पीने के लिए नींद का बहाना,
फिर भी मन पढने का ,कुछ बनता क्यो नही..
ये होना बड़ा अच्छा है वक़्त थामता क्यो नही......



Saturday, 6 April 2013



खुली जुल्फ़ें,नाज़ुक अदाए,होठों पर अपनी हँसीं लिए फिरती है
कुछ इस तरह मेरी ज़िन्दगी मुझसे रोज़ मिला करती है

चंद लम्हों में सिमटी हुई है



ज़िन्दगी की कितनी हसीं यादें ,
कुछ चंद  लम्हों में सिमटी हुई है
कुछ यादों के लम्हे है
कुछ लम्हों के यादें है
अपने इश्क  से किये हुए
कुछ अनकहे वादें है 
 कुछ चाहतें  बढती ज़िन्दगी में बिखर जाते है
और टूटे हुए सपने  मेरे पावं  में चुभ जाते है
 ये ख्वाहिशे भी अब जरा सी  थमती हुई है
ज़िन्दगी की कितनी हसीं यादे ,
चंद लम्हों में सिमटी हुई है
 कुछ चाहते जो कभी  रिश्ते न बन पाए
कुछ रिश्ते जिनमे चाहते न बस पाई 
कुछ लोग जो जान कर भी अनजान रहे
कुछ  अंजानो ने अपनों की  अहमियत बतलाई
 इश्क  और रहमत की  धूप  निकलने से
 चेहरे की रंगत खिलती हुई है
 ज़िन्दगी की कितनी हसी यादें ,
 चंद लम्हों में में सिमटी  हुई है 






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