खूब डराया और सुनाया था लोगो ने
हाथ भी उठा दिए थे
उस डरे हुए लड़के पर
बता दिया था की
ये सब नहीं चलता है यहाँ पर ,
मेट्रो के भीड़ में ,
उसे संभाले हुए
थोड़े करीब आकर
भीड़ से बचाते हुए उसे,
वो कर रहा था अपनी बातें,
शर्म की दुहाई देकर
किसी ने मशहूर कर दिया है
उन्हें सोशल मीडिया पर
वो अपने दोस्तों के संग
जता रही थी अपना होना
उसकी हसीं खुशी बेफिक्र थी
और उसकी आवाज़ बेबाक
यौवन कैसा होता है
पता चलता था उसे सुनते देखते
पर खुद को छुपा लेना बेहतर है
उसे बता दिया था लोगो की नजरो ने
और ठीक उसी समय
कोई पानी बहा रहा है सबके सामने
खुली दीवारों पर
छुप कर के कैद कर रहा है कैमरे में
किसी की इज्ज़त
और लड़की से शादी के लिए
खुले मुह माँगा जा रहा है दहेज़
तब लोग नहीं सोचेंगे कुछ
और ना ही कुछ कहा जायेगा
पता नहीं ये देश
कब समझेगा की
जवानी और बेशर्मी में बहुत फर्क होता है


