यहाँ से दो छत दूर वाले घर पे ही रहती है
दो साल पहले आई थी
चौदह बरस की उम्र ले कर
ब्याह कर लाया था मुनीम का बेटा पास वाले गाँव से
दस बरस का फ़ासला था दोनों की उम्र में
वो आज कई दिनों बाद दिखी
अपने दो बच्चों के साथ
अब्तर मन से खेल रही थी उनसे
खुद को ढूँढ रही थी शायद
जो चौदह की उम्र में गुम हो गई थी
जवाब खोज रही थी, की बचपन जिए बिना
कोई कैसे किसी को बचपन का इल्म देगा
और इन्ही फिरकों में अक्सर भूल जाती है
की वो अब एक माँ है ॥
पर ये कितना वाज़िब है
किसी का बचपन छीन कर
उसे किसी और का बचपन सौंप दिया जाये ॥
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