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Monday, 13 July 2015

अब मुझको फिर से इंसान किया जाये




ज़माने से मुझको अनजान किया जाये
अब मुझको फिर से इंसान किया जाये

मशीनों की तरह जी कर थक चूका हूँ
ज़िन्दगी को पहले सा आसान किया जाये

अब की इस दुनिया में समझादरी बहुत है
मुझको फिर से उतना ही नादान किया जाये

वो मुझको जिन्दा देखेगा तो बहुत रोयेगा
फिर से मेरे मर जाने का ऐलान किया जाये

मेरे इश्क का दुनिया में ज़िक्र बहुत है
कोई खरीद न पाए ऐसा दाम किया जाये

गुजर जाता है वक़्त पन्नों के हिसाब में
एक शाम आज यारो के नाम किया जाये

कई हसरते दबा रखी है इस दिल की तिजोरी ने    
इसे लूट कर के दिल से सरे आम किया जाये

जो बुझी हुई आँखों में एक हँसी दे दे
नेकी का ऐसा कोई काम किया जाये

आबो-ओहोदों की उड़ाने अब हम बहुत भर चुके
इस खास शख्स को फिर से आम किया जाये

और क्या मिला शराफ़त की ज़िन्दगी जीकर “बांधे”
चलो आज खुद को थोडा बदनाम किया जाये

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