कभी असमानों से ऊँची,कभी हाशिये पे झुकी लगती है
ज़िन्दगी तू चलती है , तो फिर क्यों रुकी रुकी लगती है
ज़िन्दगी तू चलती है , तो फिर क्यों रुकी रुकी लगती है
POETRY LIVES ON PEOPLE'S FACE,CRUCIAL CIRCUMSTANCES,AND EXOTIC MOMENTS...WHAT I DO IS JUST READ THEM AND GIVE THEM WORDS.....