उस लड़की में
कई लड़कियां दिखती है मुझको,
वो सारी की सारी जो खुद में
छुपा कर रखती है वो
जब कभी वो केबिन में बैठी होती है
वो लड़की होती है पहाड़ो पर
या गलियां छान रही होती है
किसी हिलस्टेशन के गांव की
और आँखों में उम्मीदों का चस्मा लगाकर
देख रही है होती है अपनी अलग दुनिया
जब पलकें भींचे
वो बात सुन रही होती है तुम्हारी
कुछ कह रही होती है
उंगलियों के सिरहाने से किसी और को कुछ
और उसी वक़्त तुम्हें सुनकर
हस रही होती है किसी और की बातों पे
वो लहज़े से खामोश रहकर अक्सर
कह जाती है सब कुछ नज़रो से
और आँखों में शैतानियां छुपा कर के
बाँट ती फिरती है पुरे ऑफिस में
एक टैटू भी गुदवा रखा रखा है
अपने दाएं हाथों में
जो शायद हौसला देता है उसे
उसे इस तरह हर बार खो जाने का
तुम्हे लगता नहीं है की मुश्किल है
इतनी हरकतें छुपा लेना सबसे
शायद इसीलिए उस लड़की में
कई लड़कियां दिखती है है मुझको
वो सारी की सारी जो खुद में
छुपा कर रखती है वो

