"चलो वक़्त की गिरहें खोल कर
दोहराते हैं सारे वाकिये फिर से
और ख़त्म करतें हैं सब कुछ
हसरतों की फेहरिस्त से
तुमने सुना है ना
यादें मिटती नही हैं
आकर देख लो
चादर की सिलवटों पर
अब भी हमारी करवटें लिखीं हुई हैं "
दोहराते हैं सारे वाकिये फिर से
और ख़त्म करतें हैं सब कुछ
हसरतों की फेहरिस्त से
तुमने सुना है ना
यादें मिटती नही हैं
आकर देख लो
चादर की सिलवटों पर
अब भी हमारी करवटें लिखीं हुई हैं "