"मुतवाज़ी लकीरें हैं हम दोनों
साथ चलेंगे पर कभी मिलेंगे नहीं
तो चलो बेफिक्र होकर
राहें पकड़ते हैं अपनी अपनी
और छोड़ देते हैं खुद को वक़्त की तर्ज़ पे
इल्म कहता है
ये लकीरें अनंत पर ही मिलती हैं"
#मुतवाज़ी = समानांतर,Parallel
साथ चलेंगे पर कभी मिलेंगे नहीं
तो चलो बेफिक्र होकर
राहें पकड़ते हैं अपनी अपनी
और छोड़ देते हैं खुद को वक़्त की तर्ज़ पे
इल्म कहता है
ये लकीरें अनंत पर ही मिलती हैं"
#मुतवाज़ी = समानांतर,Parallel