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Saturday, 30 May 2015

  "तेरे होने की कविता"




सावंले रंग में ढली हुई रौशनी
शरारतों से भरी हुई एक थैली
मुस्कुराहटों का एक अबद कारवां
और बचपन के हसीन अफसाने

एब के चाँद का एक छोटा सा टुकड़ा 
नसीहतों की एक लंबी फेहरिस्त 
नज़ाकतो की बेसुमार नुमाइश
और हवाओ का एक शांत लहज़ा 

गुस्से के सुरज की किरण
जवानी का संभला हुआ रुख
इल्म का बेबाक जुमला 
और खत्म न होने वाली बातों की किताब

कितना कुछ शामिल है तेरे होने मे 

ये सब मुक्कमल है खुद मे 
और उसपे बस एक तुम

बात एक ही है 
ये पूरी कविता कह दु 
या सिर्फ तेरा नाम !!



"एक इत्तेफाक ये भी है 

की हर एक नज़्म रो रही है

तुम जाने वाली हो

मेरी कविता खत्म हो रही है "

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